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देश
में जब सरकार द्वारा
शराब, मांस एवं मछली के
लिए विकास बोर्ड बनाया
जा सकता है तो कृषि की
रीढ़ गोवंश के संवर्धन
के लिए राष्ट्रीय गोवंश
संवर्धन बोर्ड व राष्ट्रीय गोवंश
अनुसंधान संस्थान क्यों
नहीं? यह एक गहरी
चिन्ता का विषय है | इस
गंभीर विषय पर सरकार का
ध्यान आकर्षित करने के
लिए भारतीय गोवंश
संवर्धन प्रतिष्ठान नई
दिल्ली द्वारा गत् माह
एक बैठक अयोजित की गई | इस
बैठक में भारत गोसेवक
समाज, राष्ट्रीय गोधन
महासंघ, विश्व हिन्दु
परिषद आदि गोसंवर्धन के
क्षेत्र में कार्यरत
संस्थाओं के प्रतिनिधि
मौजूद थे | बैठक को
संबोधित करते हुए श्री
मोदी ने कहा कि अब हमें
उच्च स्तर पर पहल करनी
होगी ताकि संस्थानों के
गठन का रास्ता साफ हो सके |
यह चिन्ता की बात है कि
देश में भेड़, बकरी, ऊंट व
सुअर तक के लिए अनुसंधान
संस्थान है पर गोवंश के
लिए नहीं, जबकि गोवंश का
राष्ट्र के विकास में
महत्वपूर्ण योगदान है |
आज हमारा गोवंश खतरे में
है| गोवंश की अनेको
नस्लें खत्म हो चुकी है
या खत्म होने की कगार पर
है | सरकार स्वयं मानती
है कि एक प्रजाति के नष्ट
होने से राष्ट्र को
अरबों डालर की हानी होती
है | अतः गोवंश के
संवर्धन की महती
आवश्यकता है | गो संवर्धन के क्षेत्र
में कार्यरत सभी
संस्थाओं से अनुरोध है
कि हम सभी को मिलकर सरकार
पर दबाब बनाना चाहिए |
योजना आयोग ने पशु शक्ति
को ऊर्जा की श्रेणी से
बाहर कर रखा है | इस कारण
भी गोवंश की हानि हो रही
है | सरकार किसानों को
रसायनिक खेती के लिए
भारी अनुदान दे रही है पर
सजीव कृषि के लिए नहीं |
अतः इस ओर भी कार्य करने
की आवश्यकता है, जिससे
किसान पुनः बैलो से खेती
करें औरा समृद्ध हों |
बैठक को श्री विष्णुहरि
डालमिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
चरतीलाल गोयल, एन जे कामथ,
जंसवन्त राय एवं विजय
खुराना आदि ने संबोधित
किया | बैठक के समापन
में राष्ट्रीय गोवंश
संवर्धन बोर्ड और राष्ट्रीय गोवंश
अनुसंधान संस्थान बनाये
जाने के लिए सर्व सम्मति
से प्रस्ताव पारित किया
गया |
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