Home  | About Ahimsa federation  | Members | Activities  | Disha Bodh  | Articles  | Ahimsa News |

 Articles>

 

 चिंतन हेतु चाहिए आपके कीमती दो मिनट का समय  (संपादकीय)
                                                                             डा. चीरंजीलाल बगड़ा

  अभी पिछले दिनो चातुर्मास कलश स्थापना पर अनेक नामचीन सन्तो का उस एक दिन का धन संग्रह एक-एक साधु के लिए लाखो - करोडो रूपयो का हुआ | क्या हमे इस देश और समाज की वास्तविक स्थिति का ज्ञान है ? धर्म में परिग्रह को पांचवां पाप क्यो कहा गया है तथा अपरिग्रह महाव्रत का यह कैसा स्वरुप है, इस पर गंभीर चिन्तन जरुरी है|

 * इस देश में दस लाख मन्दिर, मस्जिद, मठ, गिरजाघर या गुरुद्वारे है और एक करोड से अधिक संत, मुनि, मौलवी, तिलकधारी पंडित या फादर है, जो परजीवी बनकर और अन्धविश्वास / अन्धश्रद्धा फैलाकर अपनी जिन्दगी बसर कर रहे है|

* इस देश में तीस करोड ऐसे लोग है जो अपने पूरे परिवार का गुजारा पचास रुपये प्रतिदिन से भी कम में करने पर मजबूर है | दो वक्त की सूखी रोटी भी उन परिवारों को नही नसीब होती |

* दूसरी तरफ पांच लाख परिवार ऐसे है जिनका दैनिक खर्च दस हजार रुपयो से भी अधिक है और तीस लाख परिवार ऐसे है जिनका दैनिक खर्च पांच हजार रुपये से अधिक है |  शायद इसीलिए भगवान महावीर ने परिग्रह को पांचवां पाप बताया और अपरिग्रह को पांच धर्मो में स्थान दिया |

* विश्व में करीब तीन सौ भिन्न-भिन्न धर्म या सम्प्रदाय है जिनकी धर्म- अधर्म, पाप- पुण्य की व्यख्यायें अलग- अलग है| धर्म, हमारा धर्म और आपका धर्म हो गया, सबका धर्म नही बन पाया | प्राणी मात्र का धर्म नही बन पाया | क्या धर्म अलग- अलग हो सकते है ? धर्म तो आत्मा के स्वभाव का नाम है |

* हम जिस गुरु के भक्त है कही उस गुरु के अन्ध- भक्त बनकर जीवन के परम लक्ष्य से दूर तो नही हो रहे है? आत्मसाधको के धर्म में कही स्पीडब्रेकर का काम तो नही कर रहे है? कही हम सामाजिक न्याय के विपरीत क्रिया के दोषी तो नही बन रहे है?

* समाज के अभावग्रस्त लोगो के लिए, उनके स्वास्थ और शिक्षण के लिए , बेबस बालाओं के विवाह के लिए समाज की क्या कोई सार्थक पहल है? जीव-दया- अहिंसा और शाकाहार प्रचार के लिए क्या कोई सामाजिक जाग्रति है? मन्दिरो और संस्थाओं मे लाखो करोडो रुपयों के अनुत्पादक फंड पर कौन कुंडली मारे बैठा है? समाज का धन प्रवाह किधर जा रहा है?

चिंतन के लिए आपके कीमती दो मिनट का समय अपेक्षित है|

    
 

 

  


     

                                                                                                                                                                 

                             Site copyright ã 2008, ahimsafederation.com All Rights Reserved.                  

                                   Best viewed at 800 x 600 screen size